काला आसमान था, घोर तूफ़ान था
सहम रही थी ज़मी,मौत का एलान था
काँप रहे थे सभी मृत्यु से डरे डरे
यत्र तत्र भागते थे, सूरमा बड़े बड़े
वो जो वीर थे,बलशाली थे महान थे।
गौरव गाथाओं में जिनके निशान थे।
वो एक तूफ़ान था जो कालरूपधारी था
जिसका हर बवंडर मृत्यु की सवारी था
भाग रहे थे सभी जिंदगी की चाह में।
मृत्यु भीख नहीं देती जिंदगी की राह में
मैं भी भागता था,गिरता था संभलता था।
मृत्यु के समय को टालता बदलता था।
इतने में एक चिराग़ देखा मैंने राह में
जाने कैसे जल रहा था,वायु के प्रवाह में।
ज़िंदगी अमूल्य थी, पर तनिक ठहर गया।
एक चिराग़ का शौर्य दिल में उतर गया
मैंने पूछा ए चिराग डर नहीं लगता क्या
भीषण तूफ़ान से तू नहीं डरता क्या
गर्व से बोला चिराग़ यही मेरा कर्म है
जलना और बुझना दोनों ही मेरा धर्म है
इतना कहा महज़ और चिराग़ बुझ गया
रूह झकझोरता ये भय प्रवाह रुक गया
मैंने कहा खुदसे अब नही झुकूंगा मैं
जलता रहूंगा ख़ुद से नही बुझूँगा मैं।
मैं नही भागूँगा आने दो तूफां को।
देख लेने दो तमाशा ज़मी आसमाँ को
जो व्यक्ति मरने से पहले मर जाता है।
जीवन के युद्ध में कायर कहलाता है।
- अमूल्य मिश्रा


