चेतावनी अंतिम है, अपना स्वरुप विस्तार करो।
मेरा वोट चाहते हो तो घर में घुसकर वार करो।
जागो चिर निद्रा से अपनी, चीखें तुम्हे पुकार रही।
देखो धरती लाल पड़ी है, मौत हमें ललकार रही।
श्वेत कबूतर बहुत उड़ाए हम लोगों ने घाटी में।
वक़्त आ गया है किन्तु अब इन्हें मिटाओ माटी में।
और कितना लहू बहे, सीमा पर वीर जवानों का।
सब्र देश का टूट रहा है, बदला लो अपमानों का।
एक गाल पर थप्पड़ खाकर, दूजा आगे नही करेंगे।
पाकिस्तानी महलों में अब, प्रेम प्याले नही पियेंगे।
हाथ खोल दो सेना के अब, हमले बारंबार करो।
मेरा वोट चाहते हो, तो घर में घुसकर वार करो।
-अमूल्य मिश्रा


