देवो ने सुध बुध फिर खोई दानव दल फिर  भारी है। जहाँ  रण  तुमने  छोड़ा था  जंग  वहीं  से  जारी है। रक्तबीज थे दानव शायद फिर से उठ कर खड़े हुए। तुम्हें  लगा सब शांत हो  गया मगर हादसे  बड़े हुए। कही बच्चियों की चीखें हैं, और कहीं जलती  नारी। जाने  किसको कोस रही है, पापी  दुनिया  हत्यारी। फिर जमी पर आओ दुर्गा, भक्तों  का  उद्धार करो। बहुत हो चुका रण चंडी अब चंड मुंड  संघार करो। -अमूल्य मिश्रा