भाषा की कई विधाओं का विधान हिन्दी है। सभ्यता  की  मात्र  एक   पहचान  हिन्दी है। हिन्दी बोलने में शर्म कैसी, मातृ भाषा है ये। हिन्द  के  लिए  तो  जैसे  वरदान  हिन्दी है। -अमूल्य मिश्रा