एक संघर्ष है औरत, एक संकल्प है औरत।
जीवन का सार है औरत, मूलभूत आधार है औरत।
शान है औरत, घर का मान है औरत।
शुरू से अंत तक शक्तिमान है औरत।
समृद्धि है औरत, सम्मान है औरत।
विधि है औरत, विधान है औरत।
संस्कृति है औरत, वरदान है औरत।
सारे जहाँ में शान-ए-हिंदुस्तान है औरत।
सीता है औरत, विनाश है औरत।
चंडी है औरत, विश्वास है औरत।
नीयत को अपनी साफ़ रख फिर देख तू ज़रा।
तेरे लिए खुदा के समान है औरत
मेरी माँ अगर है औरत तो तेरी बहन भी तो है।
फिर क्यों शहर में बेइज्जत सर-ए-आम है औरत।
ग़लती किसी की भी हो गाली इन्हीं के नाम की है।
मिट्टी के शेरों की मानसिकता का प्रमाण है औरत।
एक अरज़ है मेरी चलो क़सम खाते है।
गालियों से इनका नाम जड़ से मिटाते है।