सरहद पार जाके शत्रु को दिखाया शौर्य,
बारी अब आपकी ये कर के दिखाइए।

मारकर गीदड़ों को झुण्ड में फंसा है सिंह
वक़्त है ये आप जाके उसको बचाइए।

कूटनीति से जिनेवा संधि का प्रयोग कर
अपने विवेक का यूँ घोडा दौड़ाइए

देशवासी वंदन में आपके नवाएँ शीश,
भारती का चंदन अभिनंदन छुड़ाइए।

-अमूल्य मिश्रा