रोज़ इक किरदार कम हो जाएगा
एक दिन किस्सा ख़तम हो जाएगा
साथ तो देंगे ये दुनिया वाले पर
मर के जब दूजा जनम हो जाएगा
अब भी लगता है मुझे वो साथ है
जल्द उनको भी भरम हो जाएगा
रोक लो मुझको मैं अब कुछ कह न दूं
ख़्वामखां इक दोस्त कम हो जाएगा
ज़िन्दगी जैसा यहाँ कुछ भी नही
इक तमाशा है ख़तम हो जाएगा
-अमूल्य मिश्रा


