ये जो बच्चा है ये देखा हुआ है
ये मैं हूँ या मुझे धोखा हुआ है
घड़ी भी मिल गई है वो पुरानी।
यही पर वक़्त भी बिखरा हुआ है।
अगर नाराज़ है तो सुन दे गाली।
मुझे ये तो बता रूठा हुआ है।
दुआ तारों से सबने मांग ली है।
वो क्या देगा जो ख़ुद टूटा हुआ है।
ये मज़हब तो नही है इक ज़हर है।
न जाने क्या है जो फैला हुआ है।
-अमूल्य मिश्रा


