कुछ लड़कियां ऐसी भी होती हैं

जिनका किसी की सुंदरता से कोई सरोकार नहीं होता है

वो मरती हैं सुंदर हृदय पे

जिन्हें नहीं चाहिए अथाह दौलत

न ही गहन इच्छा होती है

ऐशो आराम की

वो बस सूकून ढूंढती फिरती है 

कभी अपने और कभी अपनों के चेहरों पर

कुछ लड़कियां खोजती हैं

अपना अस्तित्व 

उड़ जाना चाहती हैं दूर आकाश में

और देखना चाहती अपनी हद

लेकिन अपने नज़रिए से

नाकि समाज की नजर से

कुछ लड़कियां जीवन के समुंदर में

गोते लगाना चाहती हैं

कभी डूबना तो कभी उतराना चाहती हैं

बस किसी मांसाहारी मछली का 

भोजन नहीं बनना चाहती

कुछ लड़कियां

घर संवारना चाहती हैं

परिवार की नींव मजबूत बनाना चाहती हैं

कल के भविष्य का आज सजाना चाहती हैं

कुछ लड़कियां ऐसी भी होती हैं

जो बेफिक्र हो आज को जी रहीं हैं

वो कल के चक्कर में 

अपना आज नहीं गंवाना चाहती हैं