हर कोई दुःखी है
हर किसी को कुछ न कुछ दुःख है
दुःख का कोई पैमाना नहीं होता
हर किसी को अपना दुःख
दूसरों से ज्यादा
दूसरों का अपने से कम ही लगता है
पर कभी ध्यान देना तुम
जो सबसे ज्यादा दुःखी होता है
वो कभी नहीं रोता है
हमेशा दुःखी मन को ढांढस बंधाता है
कब वो अपने हिस्से की मुस्कान अपने चेहरे से
तुम्हारे चेहरे पर सजा देता है
तुम्हें पता भी नहीं लगता
तो अपने दुःखों को बांटों अपनों से
पर कभी समझौता न करना जीवन के सपनों से
जिंदगी कभी थमती नहीं, रूकती नहीं है
दुःख के बाद तो सुख का आना हमेशा से तय है
और अगर लगता है तुम्हें तुम सबसे दुखी हो
तो दूसरों की मुस्कुराहट के सबब बनों
फिर देखना कैसे तुम्हारे सारे दुःख
छूमंतर हो जाते हैं
