भूल गई वो समानार्थी बातें,
जो सुख में सुख,
दुख में दुख जताते थे,
द्वेष की ये भावना
अब विलोमो को गले लगाये रहती है,
परिंदे घर में कैद हैं,
और मरी हुई गैरत,
आते जाते हर मुसाफिर को,
पंछी प्रेमी बताए रहती है,
खाक है ये भावना,
हराम है,
आस पास अब बस,
विलोमो का बास है....