40 poems in 40 days challenge


तुम्हें चाह लेती,

तो तलब मर जाती,

तलब मर जाती,

तो मेरा मोह ख़त्म हो जाता,

तुम इतने हसीं थे,

कि,

मैं तुम्हारी तलब रखना चाहती थी,

मैं तुम्हें प्रेम नहीं करना चाहती थी,

मैं तुम्हें प्रेम नहीं कर सकती थी,

मुझ में इतना साहस नहीं,

कि,

मैं तुम्हें प्रेम कर सकूं...


#day 32