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श्रृंगार


प्रकृति का एक श्रृंगार देखा मैनेंआसामा के नीचेइस छायानय के भवर राग मेंएक जोड़ा मैना काहर सुबह जिनका दिदार करती मैंअपने दिनचर्या शुरु से.....कितना अद्धभुत नवसंचार था.....उनकी मधुर बेला मिलन मेंदोनो प्रतीक थे एक स्वस्थ सृष्टि का.....

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