40 poems in 40 days challenge चल प्रेम करें, मोह धरे, जब तक तुझसे हो पाएगा, तू प्रेम करना, मोह धरे, जब तक मुझसे हो पाएगा, मैं प्रेम करूंगी, मोह धरे, इसमें कोई मिलन नहीं होगा, इसमें कोई विरह नहीं होगा, सच कहूं तो, कोई प्रेम भी नहीं, और ना ही, कोई मोह, बस यथार्थ वाली, सांत्वना होगी, एक दूसरे के दुखों में.. #day 9


