40 poems in 40 days challenge
पराग कणों के व्यापारी,
कर रहे हैं,
कमरों की पहरेदारी,
तो कहां से खिलेंगे गुल,
और कहां होगी,
यादों की साझेदारी,
बेहतर है,
उनका भी,
उनके गिरोह के साथ होना,
फूल का फूल ही होना,
आदम की पकड़ से दूर रहना,
और दूर से ही,
अपनी लालसा भरना,
मन में चाह पाने को,
उनके जैसे खिल जाने को,
फूल तब ही फूल रहेंगे...
#day 7

