40 poems in 40 days challenge प्रेम, अगर थोड़ा कम प्रेम रहे, तो ही वो प्रेम महसूस कर सकता है, प्रेम, अगर प्रेम से, पूर्ण संलिप्त हो तो, वो आराधना बन जाता है, और, आराधना में समर्पण होता है, नखरें नहीं होते, रूठना मानना नहीं होता, इंतजार, फलक, और, इत्तेफाक भी नहीं होता, इसलिए, कभी प्रेम करना तो, कम ही करना, खुद को बचा के रख पाओगे... #day26

