जिंदगी जज्बातो पे टिकी है,
सबका सबसे एक स्वार्थ है,
कोई साथ भी हमारे इसलिए है,
 कि वो औरो से दूर है,
तो अगर हम प्रेम पाते हैं,
फिर क्यू परेशान हो जाते हैं,
जब हमारे हक से,
वही प्रेम,
किसी और को जाते हैं
कायनात भी तो,
मोलभाव पे ही चल रही है,
जितना पाया है,
उतना देना भी तो होगा,
जिंदगी है तो,
मौत भी तो सहना होगा,
हमारी जिंदगी की मंजिल,
मौत,
वो भी तो भुखी है,
स्नेह और प्रेम की,
जो उसे,
उसकी दुनिया में मिलता है,
तो वो भी ले जाती है हमें,
हमारी दुनिया के बाद,
उसकी दुनिया में.....