वे निःशब्द नहीं रहते
वे भी बोलते हैं
अपनी करुण पुकार से
क्रन्दन से
जब आघात किया जाता है उन पर
सिकुड़ जाते हैं पत्र उनके
स्राव होने लगता है
कटती शाखाओं से
तरल पदार्थ की धारा का
पर कहां देखता है आदम उसको
आदम तो
आदम को भी नहीं देखता
जब मार रहा होता है
वे तो चीखते हैं ना
पुकारते हैं
विलाप करते हैं
फिर भी कहां रुकता है आदम
वह काट देता है
नोच देता है
टुकड़े टुकड़े कर देता है
छिन्न-भिन्न
समस्त नष्ट कर देता है
काटने वाले
काट देते हैं
अपने ध्येय को
प्रथम अपनी मानसिकता से
पुनः शारीरिकता से...

