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मानव दिव्य है


ये जो फेर बदल है सूरज और चंदा कातुम्हारी आंखों का भी है

वो भास्कर जो अर्क की तरहतुम्हारी आंखों में नूर ले आता है

तो आंखें तुम्हारी महताब सेशीतल झेप भी ले जाती है

यकीन मानो मानवकायनात में तुम भी दिव्य हो...

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