हर हर महादेव, सभी का कल्याण करते ध्येय, करते हैं युद्ध वो तभी, जब लुटाना होता श्रेष्ठता का सफ़र, श्रवण कुंड से होकर उठाते हैं धम धम, हैं वो महाकाल,विश्वनाथ, समयनाथ, उनका हृदय करुणा का पार्थ, चंद्रमा उनके माथे सजता है, प्रारूप है जो मानव के, भक्ति सागर लिन है , करुणा में जिनके मेघ है, वो ऐसे महाकाल है, बेल पत्र जिनको बुलाये, भांग सुगंध दिल को लुभाए, वो कर लेते समय का शिकंजा, वो महादेव, वो सुंदर शिव,