40 poems in 40 days challenge तेरे कशों में, गुलाब के जाले हैं, रेशे रेशे में, महक है, शहतूत के पत्तों की, पर अपने हाथों से, छुअन, तेरे कशों की, अंत से आरम्भ तक, कई सवाल खड़े कर देते हैं, मैं, साहसा, अचंभित हो जाता हूं, और, जवाब ढूंढने लगता हूं, तेरे केशो को, ढाह भरे अपनी मुट्ठियों में... #day 17

