Poetry 1 min read 173.6K reads

कसाई


सालों हल जोता उसनेधूप, बारिश, कीचड़ सब सहे

आज बूढ़ा हुआ तोहाट में खड़ा है बिकने को

जिनके पासअपने पेट पालने के पैसे ना हो

वे दो बूढ़े बैलों को कहां से पालेंगे

परिणाम पश्चात गरीब किसानगरीबी में कसाई हो जाते हैं..

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