40 poems in 40 days challenge


प्रेम की जितनी कविताएं मैंने पढ़ी,

लिखी,

देखी ,

सुनी,

सबमें यहीं कहा गया,

वो आता है,

वो चला जाता है,

वो आया था,

वो आयेगा ,

पर हकीकत में,

प्रेमी कभी आते ही नहीं हैं,

प्रेमी कभी जाते ही नहीं,

वो तो ठहर जाते हैं,

मन में,

घुटन में,

अगर कहूं कि आंखों में,

तो ये झूठ होगा,

आंखों में तो लालसा भरी होती है,

भूख की,

घर भर के पेट भरने की,

तो ,

वो,

मन में ही होते हैं या फिर,

घुटन में,

बहुत दूर नहीं होते वो,

कि उनका बेसब्री से इंतजार हो,

वो कहीं आसपास होते हैं,

गावों के,

शहरों के,

कस्बों के,

गलियों के,

कई दफा मुलाकात भी होती है,

सिर्फ देह की ही नहीं,

नजरे भी मिलती हैं,

और अपनी अपनी आंखों में,

अपने अपने घर के सपने लिए हम चले जाते हैं,

अपने अपने घर को वापिस,

अफसोस कि,

अफसोस करने को भी,

उतना अफसोस नहीं होता...


#day 35