जिंदगी अजीब तो है ही,
उम्मीदों के गठरी सी,
हर रोज जियो तो,
सुकून से कट जाती है,
और बहुत आगे की सोचो तो,
हर दिन ही कम पड़ जाता है,
पर ये बस,
शब्दों का फेर ही तो है,
घुमा फिरा के जिंदगी,
उसी कटघरे में लाकर खड़ा कर देती है,
जहां से हमने,
सब शुरू किया था,
कभी मैं जिंदगी को कोसती हूं,
कभी जिंदगी मुझे,
पर हार थक के भी हम,
एक दूसरे का साथ,
निभा ही लेते हैं.....