Poetry 1 min read 357.6K reads

एक स्त्री


40 poems in 40 days challenge

कितनी कविताएं रची हैं,चूल्हे पे धीकती,उन हाथों ने,शायद,संख्याओं में,उतने नहीं हो पाते,गर,रह गए होते,सूते मुलायम,कविताओं के जितने शीर्षक,मैंने चावल बिनते धरे हैं,उतने,शायद,मेरी लेखनी नहीं सजा सकती थी...

#day 23

Read more Earn more Learn more