तेरी लिखी चंद पंक्तियां मुझपे,
उमर भर का सब्र जता गयी,
तू कविता बन के मेरी ख्वाबो में,
हर रोज़ याद आता है,
सामने टंगी हुई वो तस्वीर,
तेरे लिखावटो वाली,
जब कभी जीवन के नगमे बिगड़ते हैं,
उन्हें पढ़ लेती हूँ,
पूछे जो कोई इश्क की परिभाषा,
मन में तेरा नाम दोहरा,
उस तस्वीर की तरफ चेहरा कर जाती हूं,
खिलखिला जाती हूं एक हंसी,
और सबसे झूठ कह जाती हूँ,
अरे मुझे कहां,
इन सब की समझ,
जिसे छोड़ जिंदगी भर,
मैं कुछ समझ ही नहीं पायी.....

      #amrita