पानी ने भी किया है,
मछलियों से प्रेम,
अथाह प्रेम,
चूंकि मछलियां सजीव हैं तो,
वे तड़प जाती हैं ,
पानी के वियोग में,
पानी अपनी निर्जीवता में,
नहीं दिखा पाता अपनी तड़पन,
किंतु बात अगर प्रेम की ही है तो,
वह तोड़ देता है बांध,
जब भर जाती है नदी,
अपनी क्षमता से अधिक,
जब आदम फांसने लगता है,
मछलियों को अपने जालों में,
पानी उफ़ान मारता है..

