मेरे केशों को सवार,
चोटियां बना गया वो,
मुझे नाज है,
मेरी मोहब्बत पे,
जाम होठों का नहीं,
अधरों को माथे से सटा,
सर पे दुपट्टा सजा गया वो,
कच्ची उम्र है,
ये जानता है वो भी,
सर पे हाथ दुलार का,
किताबों का उसूल भी सीखा गया वो,
आजमाईश है,
कहीं दूर से आते,
किसी परिंदे का,
भनक है उसको,
समाज में,
पलते विरह का,
इससे पहले की मैं बिखर जाऊं पूरी तरह,
मोह और प्रेम का,
भेद बता गया वो....