40 poems in 40 days challenge
कायनात के ढेर में,
एक झुंड,
पंछियों का,
शहरों में भी था,
पर,
जब पूतने लगी दीवारें शहरों की,
वो पलायन कर गए,
गावों में,
अब मिट्टी धीप रही,
वहां की भी,
एक रोज होगा,
वो फिर पलायन कर जाएंगे,
और,
सिहोर लेंगे,
अपनी उड़ान को,
आसमां तक,
तब कभी कभी ही आया करेंगे,
धरती पर
चांद सूरज जैसे...
#day 19

