जो रंग है चढ़ा हम पर,
वो रंग नहीं,
जो खोया,
वो सपना नहीं,
सच था,
हा जिसे पाना है,
वो सपना जरूर है,
ना जाने क्यों,
वक़्त से पहले ही,
कुछ सपनों का,
उतर गया फितूर है,
कभी कभी धुंध ही बच जाती है,
कुछ पाने में,
डरते हैं क्यों हम ,
रौशनी से टकराने मे,
चुप्पी तो,
बहुत कुछ कहती है हमारी,
असमर्थ है हम,
क्यों उसे समझाने में....

