40 poems in 40 days challenge
मेरे यादों की,
एक खुली अलमारी,
जिसमें तह हो बदन ढकने वाले,
मुट्ठी भर कपड़े,
जौ के थोड़े बीज,
एक खारे मिट्टी का घड़ा,
और,
एक टुकड़ा कांच का,
रखना चाहती हूं,
हमेशा तैयार,
जब कभी हिम्मत कर लूंगी,
चली जाऊंगी,
मैं,
सबसे दूर,
ढूंढने अपना बयार...
#day 27

