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आगाज-ए-डर


चाहत इतनी है तुमसे कितुम्हारे हर दीदार पे धर दूं अपने ढेर भर प्रेम की व्याख्यापर डर लगता हैरस्मों वाले रिश्ते में ना बंध पाएं तोक्या वजाहत दूंगी मैं अपने एकतरफे मोहब्बत कोकि सौंप दो खुद को मुझेपर बस शब्दों में...

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