40 poems in 40 days challenge


एक कल्पना का आधार लिए,

मन,

स्वयं को भ्रमित करते रहा कि,

हम कल्पनाओं से,

ख्वाबों से,

ख्यालों से,

यथार्थ से,

सपनों से,

जी सकते हैं,

पर,

हकीकत में ऐसा नहीं है,

कोरे काश,

सिवाय काश के कुछ नहीं देते,

खाली मन,

सुख जाता है,

आपको जीते रहने के लिए,

खुद को खपाना होता है,

ढोंग में...


#day 20