Poetry 1 min read 481.7K reads

वबा ए खुदग़र्ज़ी


किस क़द्र फैली है वबा-ए-खुदग़र्ज़ी चार सूखुदा से पहले खुदी का ख्याल आता है

यूँ तो बेइंतहा मोहब्बत है मेहबूब से मग़रउसके ज़ख्म से पहले खुद के ग़म का ख्याल आता है।

रूही

Read more Earn more Learn more