Poetry 1 min read 0 reads

मीत...


बिजुरी गिरत है .... अब मो पर, तुम्हरे प्रीत कीरुदन क्षपा कटत है, आस रही न तेरे मीत की ..

— अभिषेक पाण्डेय
Read more Earn more Learn more