गुमशुदा -
वैसे तो मैं
उसके साथ ही, चल रहा था..
उसका नाम "विकास" जो था
एक दिन,
वो सबके साथ चलने लगा...
और, ना जाने किधर वो खो गया...!
आज, ढुंढने पर भी ना मिला..
ये तो ऐसा हुआ की,
"एअरपोर्ट पे, रेल आने की राह देखने जैसा..."
हम तो राह की कगार पे हैं
अपना विकास जो गुम हैं..
हर जगह, पोष्टर तो लगे हैं
पर, पुलिस हैं की,
बार - बार पूछ रही है..
"दिखने में वो कैसा था..!!
कोई पहचान, या कोई निशाणी...!!"
मैंने खूब कहा,
स्मार्ट था, बुलेट ट्रेन से भी तेज था
भविष्य उसका उज्वल था
जेब में उसके लाखों थे, वो जुमला ना था
नोट में पुराना नही, तो नया रंगीन था
उद्योग जगत में तो अव्वल था
रोजगारी में तो होनहार था
पर जरा, घुमने -फ़िरणे का शौकीन था
मितरो कीं, यारी में मशहूर था
रंगरूप, सजने-सवरणे में मशगुल था
आजकल, बिमारी के कारण थोडा उदास था
जाते वक्त, मुहं पे उसके मास्क था
लोग-प्रेस से बात करने, हिचकता था..
साहब, ऐसा था मेरा यार "विकास"
आज, हर दिन दिखता तो हैं,
खबरों में, टीव्ही में, पेपर के पन्नो में...
जाहीरतों में, पेट्रो -डिझेल के पम्प में...
वैक्सीन के सर्टिफिकेट में,
राम कीं पुजा में...
दिवारोंकी पोष्टर में, मन कीं बात में...
पर, क्या करे.. वो पकड नही आता हाथ में...
गुम हैं, जन-धन कीं बात में...
उसका नया नाम भी था..
"सबका साथ-सबका विकास"
तलाश तो आपकी और मेरी जारी हैं..
सुना हैं कि, भाग के वो सीमापार गया हैं..
उधर वो नापाक चायनीज हो गया हैं..
कभी-कभी नाम बदल कर, घूस आता हैं..
तब उसका नाम "विनाश" होता हैं..
शुक्र हैं रामजी का,
अभी तक, आज-तक पे,
छपा नही नाम उसका...
मेरे डेथ वारंट - मृत्यू सर्टिफिकेट पर...!!
साहब,
कही मिला तो
कॉलर पकड के, खिंच के लेके आना...
पर लाना मगर..जरूर !!
तात्पर्य :-
" गुमशुदा विकास हैं... तलाश मेरी जारी हैं "
-अमोल -३७.


