“कलम”'s image

खाली वक्त में,  जब आगे - पीछे की सोच होती है - तो कई सारे सवाल उठते हैं और एक कलम ही है जो अपनी रंजिश से कागज पर लिख देती है यह कविता


“कलम”

ख्वाहिशे तो , हजारों रखी थी,

कुछ सीखने की उम्मीद भी  थी ,

पर क्या करें, पढ़ाई बीच में गई ll


वरना हौसले तो,  बहुत बुलंद थे

कुछ करने की , उमंग भी  थी,

पर क्या करें,  मधुशाला जो  मिलने गई ll


राह चुनी हुई थी, मंजिलें भी करीब थी,

खुदा

Read More! Earn More! Learn More!