माज़ी के खुशी और गम दोनो ने रुलाया है

वो और भी याद आया जिसे हमने भुलाया है


कोई बेवफा निकला किरदार ये उसका था

हमने तो मौहब्बत का हर रिश्ता निभाया है


कोशिश तो बहुत की थी कोई खुश न हुआ हमसे

हमने भी खुद को फिर खुश नहीं पाया है


जिन्हें सोचके आंखों से आंसू टपके मेरी

क्या कभी उन आंखों मे गीलापन आया है


रोया था मौसम भी तन्हाई पर मेरी

अपना बनके गया वह फिर नहीं आया है


इसके आगे "आमोद" कोई रस्ता नहीं जाता

ये कौन सी मंज़िल है ये किसने बुलाया है