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ठहराव


दुःख कभी ठहरा नहीं

सुख का भी पहरा नहीं

कभी दुख मिला कभी सुख मिला

कभी विचलित सा कुछ मिला

जब खिलती सी मुस्कान थी

कहीं डगमगाता खुद मिला था

था कुछ हृदय में गहरा कहीं

दुःख कभी ठहरा नहीं

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