कवियों का हृदय टूटता है तो
उनके अश्रु नहीं बहते किसी के सामने
न ही किसी अकेले अंधकार कमरे में दर्पण के सामने
उनके सारे दुःख और अश्रुओं की धारा
बह जाती है उनकी लिखी कविताओं की आत्मा में
क्योंकि कवि सबसे पहले किसी प्रिय को नहीं
साहित्य को आलिंगन कर रोते है


