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गरीब


कभी कभी सोचता हूँकवियों की जेबें भरी होंगी

तो कविताओं मेंउन गरीबों को कौन लिखेगा

जिनके जेबें भी नहीं होतीपैसे रखने के लिये

इसीलिए शायद भगवानगरीबों को भी कवि बना देता है

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