दुःख का वजन कुछ नहीं होता
पर जब ये मुझमें होता है तो
इसे तौला नहीं जा सकता
जीवन के अनुभव और सुख को मरोड़कर
ये हमेशा से हावी रहा है हृदय में
दुःख को मैंने हर बार डाँटा
उस पर चिल्लाया पर ये कभी मुझे नहीं सुना
ये आता रहा हमेशा और ये तब तक आता रहेगा
जब तक मैं इसको मिलता रहूँगा
अब मैंने दुःख और सुख दोनों को
पहचानने से इंकार कर दिया है
देखता हूँ अब कैसे खोज पायेगा ये दुःख मुझको
और बेचारे सुख की कोई गलती नहीं थी
ये अनायास ही मेरे हाथों मारा गया ।


