ये बहाव सरिता की
मेरे ह्रदय से गुजरती है
नाव भी विपदा की
मस्तिष्क में उभरती है
चिंतन मनन की मेरे
है गूढ़ अपनी बातें
मैं इसे समझता हूँ
ये मुझे समझती है


ये बहाव सरिता की
मेरे ह्रदय से गुजरती है
नाव भी विपदा की
मस्तिष्क में उभरती है
चिंतन मनन की मेरे
है गूढ़ अपनी बातें
मैं इसे समझता हूँ
ये मुझे समझती है