गम ही गम है मेरे आशियाने मैं
तुम आजाओ तो बहार आजाये
कौन मेरा अपना है इस ज़माने मैं
तुम आजाओ तो चहरे पे निखार आजाये
ज़िन्दगी, जैसे झड़ते है पत्ते पतझड़ मैं
तुम आजाओ तो सावन, त्योहार आजाये
ना कोई मज़ा अकेले ज़िन्दगी बिताने मैं
तुम आजाओ तो दरिया के पर हम आजाये
बरसो से ज़िंदा है ''असीम'' तेरे इंतज़ार मैं
तुम आजाओ तो कुछ सांसे और आजाये
क्यों जीना है यो रोज़-रोज़ उधार मैं
तुम आजाओ तो जान मैं जान आजाये