जब लगाई थी उन्होंने हमारे नाम की मेंहदी हमारे मिलने के पैगाम की मेंहदी   मेंहदी की ख़ुशबू से महक उठी थी राते हमारी उस रात चलती रही ना ख़त्म हुए बाते हमारी   मेंहदी जब सूखने के बाद लाल हो गई गाहड़ी सुर्ख लाल एक दम कमाल हो गई   उस रात उनके हाथो की मेंहदी को हम निहारते रहे लग ना जाये कही हमारी ही नज़र उन्हें, हम नज़र उनकी उतारते रहे   क्या खूब रंग दिखाया उस मेंहदी ने जो लगी थी उनके हाथ पर हमारे नाम की ख़ुशबू से उस मेंहदी की मैं नशे में चूर हो गया सच कहूँ हो फिर ना बची गुंजाईश किसी जाम की   जब लगाई थी उन्होंने मेंहदी हमारे नाम की "असीम" हमारे मिलने के पैगाम की