सभी सपने टूट गए है आज मौला अब ना रहे कोई भी राज़ मौला सब कुछ तो तेरे सामने है आज मौला क्यों तुझको नहीं मुझपे अब नाज़ मौला क्यों तू आता नहीँ मेरे आशियकने की ओर मौला अब तो मंडराते है मेरे आश्मान पे बॉज़ मौला बेआबरू हुआँ हूँ इतना मैं आज मौला की छिन गए है  मुझसे मेरे ताज़ मौला मेरे फरयाद भी तो सुनले आज मौला क्यों तुझे बेशुरे से लगते है मेरे साज़ मौला