हम दुःखों से घिरे होते हैं पर दिन नही कटते

हम नींद में होते है और दिन बदल जाते हैं।


हम मिन्नतें करते हैं पर बारिश नहीं होती

हम उदास बैठते हैं बादल चले आते हैं।


आँधियाँ ज़ोर लगाती हैं पत्ते नही गिरते

मौसम बदलता है पत्ते गिर जाते हैं।


कुछ ज़ख़्मों पर दवा असर नही करती 

कुछ घाव बिना दवा के सूख जाते हैं।


हम दुनिया से लड़ते हैं पर ख़ुद को नही बदलते

हम प्रेम में होते हैं और हम बदल जाते हैं।


कुछ बदलाव वक़्त के साथ आते हैं

और हमें लगता है लोग बदल जाते हैं।


अमित 'मौन'