
हे राष्ट्र ऋषि, हे महर्षि, हे योगऋषि, हे ब्रह्मर्शी
हे शिवभक्त ,हे रामभक्त, हे पुरूषोत्तम, हे चक्रवर्ती..।
हे अवतारी ईश्वर के ,तुम ही धर्म के पोषक हो।
तुम वरद पुत्र हो ईश्वर के,तुम चर , तुम ही अचर ,तुम ही सनातन के द्योतक हो।।
पर प्रभु मेरे दयालुताया थोड़ा सा इस देश पर उपकार करो
जो कट रहे है सर जवानो के ,उस पर थोड़ा विचार करो।।
मत लो प
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