जब देनी पड़े गवाही हर वक़्त बेटे को माँ का लाल होने के जब पूछे जायें हर वक़्त आपसे सवाल आपके होने का जब सड़कों पे घूमते हों लोग करने को पैमाईश उसके जज़्बातों का जब रसोई की महक सूंघ कर भीड़ों का प्रतिकार उठे मज़हब की अंधी आँधी का उन्मादी हुंकार उठे जब नफ़रत और घृणा का चारों तरफ़ माहौल बनाया जाए सत्ता की ख़ातिर क़त्ल ए आम कराया जाए जब गंगा जमुना की तहज़ीब को साज़िश के तहत भुलाया जाए जब कुछ चन्द शैतानी लोगों को लेकर पूरे क़ौम पे सवाल उठाया जाए तो गर कोई अपना हमें दिखाये आइना तो बुराई क्या है थोड़ा तस्दीक़ हम आप भी करें जाने तो सही सच्चाई क्या है