हिंदी तन ,हिंदी मन ,हिंदी जीवन
तुझ से अर्जित है ये सामर्थ्य
लिखना ,बोलना , और अर्जन
हे माँ हिंदी स्वीकार करो
मेरा तुच्छ सा ये तर्पण..
हिंदी तन ,हिंदी मन ,हिंदी जीवन ..!!
नवकंठ से निकली हर ध्वनि तुम्हारी
नव उत्कंठा की हर व्यग्नि तुम्हारी
तुम्हीं से सृजित है साहित्य हमारा
बह रही ज्ञान की अविरल धारा
जो कुछ है अर्जित सब कुछ तुमको प्रत्यर्पण..।
हिंदी तन ,हिंदी मन ,हिंदी जीवन
दीन की प्रलाप तुम्हीं हो
दीनानाथ की पुकार तुम्हीं हो
ज्ञानी मुनियों की विचार तुम्हीं हो
मूढ़ों को भी स्वीकार तुम्हीं हो
प्रतिस्पर्धा की धार तुम्हीं हो
कृतिकों की रोज़गार तुम्हीं हो
महाजनों का व्यापार तुम्हीं हो.
क्यूँ पुकारूँ तुझे सिर्फ़ एक दिन माँ
हमारा हर क्षण तुमको समर्पण..।
हिंदी तन ,हिंदी मन ,हिंदी जीवन
हिंदी दिवस की शुभकामना..।।
#अमित
#हिंदी_दिवस